Sunday, December 5, 2010

खाद्य विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में शिक्षा और रोजगार की संभावनाए

खाद्य विज्ञान खाद्य के सभी तकनीकी पहलुओं से जुड़ा एक ऐसा विषयक्षेत्र है जो फसल की कटाई से शुरू होता है तथा इसके पकाने और खपत के साथसम्पन्न होता है। इसे कृषि विज्ञान की एक शाखा माना जाता है और सामान्यतः यह पोषण के क्षेत्र से थोड़ा भिन्न है। खाद्यवैज्ञानिकों की गतिविधियों में
1.       नए खाद्य उत्पादों का विकास,
2.       इनको तैयार करने सेसंबंधित प्रक्रियाएं,
3.       पैकेजिंग मैटीरियल का चयन,
4.       शेल्फ़-लाइफ अध्ययन तथा
5.       प्रशिक्षितविशेषज्ञ पैनल या प्रभावकारी उपभोक्ताओंकेसाथ-साथ सूक्ष्मजैविकीय तथारासायनिक परीक्षणों से उत्पादों का संवेदीमूल्यांकन सम्मिलित है।
विश्वविद्यालयों मेंखाद्य वैज्ञानिक और अधिक मौलिक प्रतिमानों का अध्ययन कर सकते हैं जो कि सीधे तौर पर विशिष्ट खाद्य उत्पाद तथा इसके गुणोंसे जुड़े हैं। दरअसल खाद्य विज्ञान एक उच्चतम अन्तर-विषयक अनुप्रयुक्त विज्ञान है. यह सूक्ष्मजीव विज्ञान, रासायनिक इंजीनियरी, जैव रसायन विज्ञान तथा कईअन्य विज्ञानों सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ा व्यापक क्षेत्र है। खाद्य विज्ञान के कुछ उप-क्षेत्र हैं
1.       खाद्य सुरक्षा या खाद्य सूक्ष्मजीव विज्ञान-खाद्य पदार्थों के कारण होने वाली बीमारी के कारण तथा बचाव।
2.       खाद्य संरक्षण - गुणवत्ता निम्नीकरण के कारण तथा बचाव। खाद्य इंजीनियरी - खाद्य पदार्थों के विनिर्माण में प्रयुक्त होने वाली औद्योगिक प्रक्रियाएं।
3.       उत्पाद विकास - नए खाद्य उत्पादों की खोज।
4.       विश्लेषण संवेदनशीलता संबंधी इस बात का अध्ययन कि खाद्य पदार्थ को उपभोक्ता की चेतना किस प्रकार स्वीकार करती हैं
5.       फूड-कैमिस्ट्री-खाद्य का आणविक संयोजन तथा इन आणुओं का रासायनिक क्रियाओं में योगदान।
6.       फूड पैकेजिंग - इस बात का अध्ययन कि खाद्य पदार्थों को प्रोसेसिंग क उपरांत सुरक्षित रखने के लिए कैसे पैक किया जाना चाहिए।
7.       मालिक्यूलर गैसट्रोनोमी- पाक व्यवस्था तथा स्वादिष्ट व्यंजनों के व्यवहार तथा अधिक स्वाद-लोलुपता के लिए विज्ञान का अनुप्रयोग।
8.       खाद्य प्रौद्योगिकी - प्रौद्योगिकी पहलू।
मनुष्य का जीवन श्वास के बाद भोजन और स्वास्थ्य पर पूरी तरह निर्भर होता है तथा हमें स्वस्थ रखने में खाद्य विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के महत्व को, कभी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। आजकल की भाग-दौड़ के जीवन ने हमारे देश म सुविधाजनक रूप से उपलब्ध भोजन या फास्ट-फूड संस्कृति को बहुत अधिक लोकप्रिय बना दिया है। एक ओर जहा इसने डिब्बाबंद और संसाधित भोजन की मांग में वृद्धि की है तो दूसरी तरफ इसन उपभोक्ता को गुणवत्ता तथा पोषण के प्रति अधिक जागरुक बना दिया है। इन सब कारणों से भारत में खाद्य संसाधन उद्योग का भविष्य बहुत उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है। खाद्य संसाधन उद्योग में मौलिक खाद्यपदार्थ जैसे गेहूं और चावल उत्पाद तथा उन्हें खाने योग्य बनाने की प्रक्रिया सम्मिलित हैं, इसके अलावा संसाधित भोजन जैसे कि बेकरी और कन्फेक्शनरी उत्पाद, डेरी उत्पाद, मांस और मछली उत्पाद, फल और सब्जियों के उत्पाद आदि जिन्हें संसाधित और पैक करके लंबे समय तक खाने योग्य रखा जा सकता है। इस प्रौद्योगिकी ने सचमुच में हमारे देश के लोगो के लिए उनके घरों में ही पका पकाया और आकर्षक रूप में पैक किया हुआ भोजन उपलब्ध करवाकर उनकी खाने-पीने की आदतों में क्रान्तिकारी परिवर्तन ला दिया है। दरअसल यह भोजन देश में कई परिवारों की प्रतिष्ठा का चिह्‌न भी बन गया है। शिक्षण संस्थान तथा पात्रता भारत में अब कई विश्वविद्यालय खाद्य विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी में डिग्री पाठ्यक्रम संचालित करते हैं। कुछ ऐसे भी संस्थान हैं जो कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी (पीएचटी) जैसे खाद्य संसाधन के विशेषीकृत पहलुओं में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करते हैं। 10+2 स्तर पर भौतिकी, रसायन शास्त्र तथा गणित (पीसीएम) या भौतिकी, रसायन शास्त्र तथा जीव विज्ञान या कृषि विषय रखने वाले छात्र खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी गृह विज्ञान आदि में स्नातकपूर्व पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। लेकिन एमएससी (खाद्य विज्ञान/खाद्य प्रौद्योगिकी) में प्रवेश पाने के लिए पात्रता योग्यता बीएससी है (खाद्य विज्ञान/खाद्य प्रौद्योगिकी विषयों का प्रमुख पाठ्यक्रमों के रूप में स्नातक डिग्री पूर्व कार्यक्रम में अध्ययन किया हो) कुछ विश्वविद्यालय/संस्थान तथा उनमें उपलब्ध पाठ्यक्रम

क्र.सं.
पाठ्यक्रम का नाम
विश्वविद्यालय/संस्थान का नाम
1.      
बीएससी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
2.      
बीएससी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
मणिपुर विश्वविद्यालय, इम्फाल
3.      
बीएससी (खाद्य और पोषण)
डॉ. बाबा साहेब अंम्बेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद
4.      
बीएससी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, प्रियदर्शिनी हिल्स पो.आ., कोट्टयम
5.      
बीएससी (खाद्य और पोषण)
काकतीय विश्वविद्यालय, वरंगल
6.      
बीएससी (खाद्य और पोषण)
कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकत्ता
7.      
डिप्लोमा पाठ्यक्रम (खाद्य विश्लेषण तथा गुणवत्ता आश्वासन/ प्रौद्योगिकी विज्ञान)
मैसूर विश्वविद्यालय, क्राफोर्ड हाल, मैसूर
8.      
बीएससी (खाद्य संरक्षण)
मद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास
9.      
बीएससी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
मणिपुर विश्वविद्यालय, इम्फाल
10.   
बी. टैक (खाद्य इंजीनियरिंग)
चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, जिला सतना
11.   
बी. टैक (खाद्य इंजीनियरिंग)
कानपुर विश्वविद्यालय, कानपुर (उ.प्र.)
12.   
एम. टेक (खाद्य इंजीनियरिंग)
कानपुर विश्वविद्यालय, कानपुर (उ.प्र.)
13.   
बी. टैक (खाद्य इंजीनियरिंग)
जादवपुर विश्वविद्यालय (बीएससी उपरांत) कोलकत्ता
14.   
बी. टैक (खाद्य प्रौद्योगिकी)
हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिकी संस्थान (एचबीटीआई), कानपुर
15.   
बीएससी टेक. (खाद्य प्रौद्योगिकी) (बीएससी उपरांत)
नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
16.   
बीएससी टेक. (खाद्य प्रौद्योगिकी) (बीएससी उपरांत)
बम्बई विश्वविद्यालय, फोर्ट, मुंबई
17.   
एमएससी टेक. (फूड टेक. और फर्मेन्टेशन टेक.)
बम्बई विश्वविद्यालय, फोर्ट, मुंबई
18.   
एमएससी (खाद्य विज्ञान)
आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखपट्टणम (आं.प्र.)
19.   
एमएससी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
गोविंद वल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर (उत्तरांखड)
20.   
एमएससी (खाद्य और पोषण)
गोविंद वल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर (उत्तरांखड)
21.   
एमएससी (फूड एवं फर्मेन्टेशन टेक्नोलॉजी तथा खाद्य विज्ञान)
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर (पंजाब)
22.   
एमएससी (खाद्य एवं पोषण)
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयम्बत्तूर
23.   
एमएससी (खाद्य और पोषण)
कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, कृषि नगर, धारवाड़
24.   
एमएससी (खाद्य एवं पोषण)
मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर
25.   
एमएससी (खाद्य विज्ञान संरक्षण/प्रबंधन तथा खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकी)
एसएनडीटी वूमैन्स विश्वविद्यालय, १ नाथीबाई ठाकरसे रोड, मुंबई
26.   
एमएससी (खाद्य विज्ञान संसाधन/प्रबंध और खाद्य विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी)
मद्रास विश्वविद्यालय, सेंटेनरी ऑफ मद्रास, सेंटेनरी बिल्डिंग, चेपॉक, चेन्नई
27.   
डिप्लोमा (खाद्य प्रौद्योगिकी)
राजकीय बहुतकनीकि, मंडी आदमपुर, हिसार, हरियाणा
28.   
एमएससी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा, हरियाणा
29.   
बी. टैक (खाद्य प्रौद्योगिकी)
चौधरी देवी लाल विद्यापीठ पन्नीवाला मोटा, सिरसा, हरियाणा
30.   
बी. टैक (खाद्य प्रौद्योगिकी)
दून वैली संस्थान, करनाल, हरियाणा
31.   
बी. टैक (खाद्य प्रौद्योगिकी)
जवाहर राष्टीय विश्वविद्यालय, जयपुर, राजस्थान
32.   
बी. टैक (खाद्य प्रौद्योगिकी)
गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
33.   
एमएससी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
34.   
एम. टेक (खाद्य प्रौद्योगिकी)
गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
35.   
पीएच डी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
36.   
एमएसससी (खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
37.   
सर्टिफ़िकेट (खाद्य प्रौद्योगिकी)
संत लोंगोवाल डीम्ड विश्वविद्यालय, लोंगोवाल, पंजाब
38.   
डिप्लोमा (खाद्य प्रौद्योगिकी)
संत लोंगोवाल डीम्ड विश्वविद्यालय, लोंगोवाल, पंजाब
39.   
बी. टैक (खाद्य प्रौद्योगिकी)
संत लोंगोवाल डीम्ड विश्वविद्यालय, लोंगोवाल, पंजाब
40.   
एम. टेक (खाद्य प्रौद्योगिकी)
संत लोंगोवाल डीम्ड विश्वविद्यालय, लोंगोवाल, पंजाब
41.   
पीएच डी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
संत लोंगोवाल डीम्ड विश्वविद्यालय, लोंगोवाल, पंजाब
42.   
एमएसससी (खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
अनुप्रयुक्त विज्ञान संस्थान, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ
43.   
एमएससी (खाद्य प्रौद्योगिकी)
केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई), मैसूर
44.   
एमएससी (कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी)
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली
45.   
लघु अवधि पाठ्यक्रमों के प्रमुख क्षेत्र :
1.       गुणवत्ता विश्लेषण और स्तर फल और सब्जी उत्पाद प्रौद्योगिकी
2.       ताजा फलों तथा सब्जियों का कटाई उपरांत रखरखाव
3.       मांस और मछली उत्पाद प्रौद्योगिकी रखरखाव
4.       जन्तु बाधा नियंत्रण और कीटनाशक
5.       गेहूं मिलिंग एवं बेकिंग प्रौद्योगिकी
6.       खाद्य पदार्थों का सूक्ष्मजैविकीय गुणवत्ता नियंत्रण
7.       चावल प्रौद्योगिकी
8.       खाद्य पैकेजिंग
9.       कन्फेक्शनरी प्रौद्योगिकी
10.    सेकेंडरी मैटेबॉलिटस का कोशिका और टिश्यूजरिए कल्चर के उत्पादन
11.    खाद्य प्रसंस्करण उपकरण
12.    खाद्यानों का भण्डारण
13.    खाद्य फ्लेवर और मसाले
14.    खाद्य विश्लेषण की उपकरणीय पद्धति
15.    मूल्य संवर्द्धन के लिए तिलहनों की प्रोसेसिंग
16.    मसालों तथा मसाला उत्पादों की प्रोसेसिंग और विश्लेषण
17.    खाद्य उद्योगों के लिए गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ ९०००-संबंधी)
18.    खाद्य जैव-प्रौद्योगिकी
केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) मैसूर


रोज़गार की संभावनाएं खाद्य प्रसंस्कण उद्योग तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है जिसके तहत भारत और विदेश में रोजगार की अच्छी संभावनाएं है। संसाधित और संरक्षित खाद्य पदार्थों ने शहरी जनसंख्या के एक बड़े भाग की खाने-पीने की आदतों में परिवर्तन ला दिया है। भरण-पोषण क लिए खाने मात्र से अब लोग मूल्य-वर्द्धित भोजन'' के रूप में अपनी खुराक लेने को वरीयता देते हैं। जनसंख्या के विभिन्न भागों में संसाधित भोजन की खपत तथा बाहर खाने'' की प्रवृत्ति में अत्यधिक वृद्धि हुई है। इन स्थितियों में संसाधित भोजन का बाजार अत्यधिक विकसित हो रहा है। ताजा अनुमानों के अनुसार यह तथ्य काफी रोचक है कि खाद्य उद्योग देश में पांचवां सबसे बड़ा उद्योग'' है। इसमें २० लाख लोगों के लिए रोजगार सृजन हुआ है तथा हर वर्ष 2.5 लाख नए रोजगार उपलब्ध होने का अनुमान है। इसके अलावा बहुत से उन्नत देशों में यह सबसे बड़ा उद्योग है। स्पष्ट रूप से कहा जाए तो इस विकास को देखते हुए प्रसंस्करण, रिटेलिंग तथा सहकारिताएं स्थापित करने के वास्ते निवेश तथा पुनर्गठन की आवश्यकता है। इस औजार का व्यापक रूप से कृषि क्षेत्र को पटरी पर लाने के लिए भी किया जाता है जिससे खाद्य प्रौद्योगिकी उद्योग के विकास को बढ़ावा मिलता है। खाद्य उत्पादन, खरीद, संसाधन,वितरण नेटवर्क और रिटेलिंग आदि में यह क्षेत्र बड़ी संख्या में एकीकृत रूप से लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। सरकार की मुक्त बाजार नीतियों तथा वैश्वीकरण से इस उद्योग ने भी बहुराष्ट्रीय साझेदारी को आकर्षित किया है। सरकार से भी मान्यता प्राप्त यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। कहने की आवश्यकता नहीं है, यह उद्योग योग्य खाद्य प्रौद्योगिकिविदों को रोजगार के जबर्दस्त अवसर प्रदान कर रहा है। खाद्य प्रौद्योगिकीविदों के लिए व्यापक अवसर हैं, विशेषकर प्रसंस्करण उद्योगों, होटलों, खाद्य उद्योगों, गुणवत्ता नियंत्रण, औषधीय उद्योग, जैव-रासायनिक इंजीनियरी, मसाला, अनाज तथा चावल मिलों आदि के साथ-साथ अस्पतालों, पैकेजिंग उद्योगों, डिस्टीलरी, बेकरी उद्योग, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माणियों में इनके लिए रोजगार के बेहतरीन अवसर हैं। देश में इस समय नीचे वर्णित अनुपात में विभिन्न प्रकार के रोजगार उपलब्ध हैं :-
  1. फैक्टरी उत्पादन : 60%
  2. अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) : 15%
  3. सरकारी प्रयोगशालाएं : 3%
  4. शिक्षण : 2%
  5. अन्य रोजगार : 20%

पारिश्रमिक आजकल एक खाद्य वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीविद् बनना सफल कॅरिअर है तथा यह तेजी से उभरता क्षेत्र है। खाद्य विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी म स्नातकपूर्व डिग्री पाठ्यक्रम में सफल व्यक्ति फ्रेशर/प्रशिक्षु 10000 रु. से 18000 रु. तक प्रति माह वेतन प्राप्त कर सकता है। लेकिन एक मास्टर डिग्री धारक प्रतिमाह 15000 रु. से 25000 रु. प्रतिमाह की रेंज में वेतन प्राप्त कर सकता है। आज स्थिति यह है कि इस क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के प्रवेश ने रोजगार के अवसरों को बढ़ा दिया है तथा आकर्षक वेतन प्राप्त हो रहा है। यहां तक कि भारत सरकार द्वारा कुछ सब्सिडी और राष्ट्रीयकृत बैंकों के जरिए ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है ताकि योग्य खाद्य वैज्ञानिकों तथा प्रौद्योगिकीविदों को स्वयं के उद्यमशीलता कार्यक्रम शुरु करने के वास्ते बढ़ावा मिले। खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकीविद के रूप में कुछ विशेषज्ञता हासिल करने के उपरांत आपके लिए उज्ज्वल अवसर उपलब्ध हो सकते हैं तथा जहां तक वेतन और अन्य लाभों का संबंध है, इसकी कोई सीमा नहीं है।

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