दूध की धार, करियर बेशुमार
देश ही नहीं विदेशों में भी दूध और दूध से बने उत्पाद की काफी डिमांड है। यही कारण है कि विश्व के सभी देश इसके विकास के लिए प्रयासरत हैं। दुग्ध उत्पादन में भारत का विश्व में पहला और इससे बने उत्पादों में दूसरा स्थान होने के बावजूद दूध की काफी कमी है। सरकारी एवं निजी स्तर पर इसके विकास के लिए हरसंभव प्रयत्न किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका समुचित विकास तभी हो पाएगा, जब अधिक से अधिक संख्या में युवा और ट्रेंड प्रोफेशनल इससे जुडेंगे। मांग में वृद्धि और ट्रेंड प्रोफेशनलों की कमी को देखते हुए देश के बहुत से इंस्टीट्यूट में इसकी पढाई शुरू कर दी गई है और काफी संख्या में इसके लिए प्रयास भी किए जा रहे हैं। जिस तरह के रुझान मिल रहे हैं, उन्हें देखते हुए कहा जा रहा है कि सन 2011 तक यह कारोबार काफी बढ जाएगा। ग्लोबल स्तर पर जिस तरह डेयरी प्रोफेशनलों की मांग बढी है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले समय में इससे जुडे लोगों का फ्यूचर ब्राइट होगा।क्या है डेयरी उद्योग
डेयरी, पशुपालन से जुडा एक बेहद लोकप्रिय उद्यम है। बहुत से लोग समझते हैं कि इसमें केवल दूध उत्पादन का ही काम किया जाता है। यह सही नहीं है। डेयरी में दुधारू जानवरों की ब्रीडिंग, उनकी अच्छी तरह से देखभाल, दूध उत्पादन, दूध से बने उत्पादों का उत्पादन, उनकी बिक्री आदि का काम किया जाता है। डेयरी में प्रशिक्षित व्यक्ति को निर्माण की हर प्रक्रिया का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करना होता है। उसे मौसम के अनुसार आवश्यक चारे और पर्यावरण से जुडी स्थितियों पर भी गौर करना होता है। जानवरों एवं दूध की गुणवत्ता पर नजर रखना उसकी पहली प्राथमिकता होती है। डेयरी उद्योग में इन दिनों दूध से बने प्रोडेक्ट्स पर काफी काम किया जा रहा है।
प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता
भारत विश्व में भैंसों की संख्या में पहले, गोपशु और बकरियों की संख्या में दूसरे स्थान पर है। यहां वर्ष 2008-09 में प्रतिव्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 258 ग्राम प्रतिदिन पहुंच गई है। दुग्ध उत्पादन में भी इजाफा हो रहा है। सन 2008-09 की अवधि में देश में अनुमानत: 108.5 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ था, जो सन 1990-91 में उत्पादित 53.9 मिलियन टन से कहीं अधिक है। इसके बाद भी हम विश्व के प्रतिदिन औसतन 265 ग्राम प्रतिव्यक्ति की तुलना में पीछे हैं। यह केवल इसलिए है कि अभी देश में डेयरी प्रशिक्षित लोगों की संख्या में काफी कमी है। भारत सरकार एवं डेयरी उद्योग के विकास में लगी संस्थाएं दुधारु पशुओं की उत्पादकता में वृद्घि के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। उनकी प्राथमिकता है कि डेयरी टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित व्यक्तियों की कमी जल्द से जल्द पूरी हो जाए। इसके लिए अनेक स्तर पर कोर्स भी उपलब्ध हैं, ताकि अधिक से अधिक संख्या में युवा इस ओर आकर्षित हो सके। आप अपनी सुविधा के अनुसार कोर्स कर सकते हैं।
किस तरह के कोर्स
पहले डेयरी टेक्नोलॉजी वेटरेनरी व एनिमल हस्बेंड्री कोर्स का हिस्सा था। अब यह एक अलग विषय है। इससे संबंधित कई तरह के कोर्स विभिन्न संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों द्वारा चलाए जा रहे हैं। इसमें डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर व डॉक्टरेट लेबल के भी कोर्स शामिल हैं। अधिकतर संस्थानों में स्नातक लेबल के कोर्स के लिए अखिल भारतीय स्तर पर लिखित परीक्षा का आयोजन कराया जाता है। डेयरी टेक्नोलॉजी से संबंधित बैचलर डिग्री कोर्स की अवधि चार वर्ष की है। इस कोर्स को करने के बाद इसमें मास्टर्स डिग्री हासिल की जा सकती है। पीजी कोर्स की अवधि दो वर्ष है। डेयरी टेक्नोलॉजी में अधिकतर डिप्लोमा कोर्स एक से दो वर्ष के हैं। इस फील्ड में जाने वाले अधिकतर लोग जो डिप्लोमा कोर्स करते हैं वे हैं- इंडियन डेयरी डिप्लोमा, नेशनल डेयरी डिप्लोमा, डेयरी हस्बेंड्री ऐंड टेक्नोलॉजी। इसके अलावा डेयरी प्रौद्योगिकी, डेयरी रसायन विज्ञान, डेयरी सूक्ष्म जीव विज्ञान, डेयरी विस्तार शिक्षा, डेयरी गुणवत्ता नियंत्रण आदि में भी डिप्लोमा किया जा सकता है।
आवश्यक योग्यता
डेयरी टेक्नोलॉजी की फील्ड में जो लोग करियर बनाना चाहते हैं उनका बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स से अच्छे अंकों के साथ पास होना जरूरी है। इस क्षेत्र में जाने वालों को अंग्रेजी की सामान्य जानकारी होना भी आवश्यक है। यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, इसलिए जो लोग इस क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उनकी विज्ञान में रुचि होना जरूरी है। डेयरी का काम काफी मेहनत का है अत: इसे करने वालों में धैर्य, अपने काम के प्रति निष्ठा और कई-कई घंटे तक बिना थके काम करने की काबिलियत होनी चाहिए। इस सेक्टर में जानेवालों को घर से दूर ऐसी जगहों पर भी रहना पड सकता है, जहां शहर जैसी सुख-सुविधाएं नहीं होती हैं। इसलिए इस फील्ड में वही लोग जाएं, जो हर तरह की परिस्थितियों में रह सकते हैं।
अवसर ही अवसर
इस संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित व्यक्तियों के पास आने वाले समय में अच्छे रोजगारों की भरमार होगी। उनके पास सार्वजनिक एवं निजी दोनों ही सेक्टरों में नौकरियों के पर्याप्त अवसर होंगे। इस समय अपने देश में 400 के करीब ऐसे डेयरी संयंत्र हैं, जो बडे स्तर पर दूध एवं उससे निर्मित उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं। आने वाले दस वर्षो में यह संख्या इससे कहीं अधिक होने का अनुमान है। डेयरी टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित लोग डेयरी फार्म, कोऑपरेटिव सोसायटियों, मिल्क प्रोडक्ट्स प्रोसेसिंग व मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में काम करते हैं। गुणवत्ता नियंत्रण के अंतर्गत आने वाले विभागों में भी इन लागों की नियुक्ति की जाती है।
कर सकते हैं खुद का व्यवसाय
डेयरी टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण पाने के बाद अपना मिल्क प्लांट, क्रीमरी, आइसक्रीम यूनिट आदि का काम भी शुरू किया जा सकता है। बडे स्तर पर यह काम शुरू करने के लिए काफी अधिक धन की आवश्यकता होती है, इसलिए अगर बडे स्तर पर यह काम करना है, तो पहले किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह ले लें। शहरों में छोटे स्तर पर काम करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, क्योंकि इस स्तर पर काम करने के लिए अधिक धन की आवश्यकता नहीं होती है। यदि आपके पास पैसे हैं, तो आप स्वरोजगार का विकल्प भी अपना सकते हैं। इसके लिए सरकारी स्तर पर लोन की भी सुविधा भ्ज्ञी उपलब्ध है।
रिसर्च में स्कोप
जैसे-जैसे डेयरी उद्योग में विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे इस क्षेत्र में रिसर्च कार्यो को भी बढावा मिल रहा है। आज दूध से बनी चीजों का उत्पादन करने वाली सभी बडी कंपनियों के बीच नए उत्पादों को लेकर प्रतिस्पर्धा चल रही है। कंपनियां अपने प्रतिद्वंदी से ज्यादा बेहतर प्रोडक्ट मार्केट में लाने में लगी हुई हैं, इसलिए दूध से बने उत्पादों की संख्या बढती जा रही है। यह सब काम नए रिसर्चो के द्वारा ही संभव है। यही कारण है कि डेयरी टेक्नोलॉजी की जानकारी रखने वालों के लिए वेतन के लिहाज से रिसर्च की फील्ड अच्छी है। अगर आपकी रुचि है, तो आप इसमें भी बेहतर करियर तलाश सकते हैं।
मार्केटिंग में भी अवसर
डेयरी उद्योग आज एक किसी पहचान का मोहताज नहीं है। इस उद्योग में मार्केटिंग के जानकार भी बहुत कुछ कर सकते हैं। इस फील्ड से संबंधित सभी बडी कंपनियों में मार्केटिंग एक्सपर्ट की हमेशा मांग रहती है। जिन लोगों के पास मार्केटिंग का अच्छा अनुभव है और साथ ही साथ जो डेयरी टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी रखते हैं, उन्हें इस तरह के जॉब के लिए वरीयता दी जाती है।
परामर्शदाता के रूप में काम
डेयरी टेक्नोलॉजी की अच्छी जानकारी रखने वाला व्यक्ति लघु डेयरी फार्मो एवं दुग्ध संयंत्रों के लिए परामर्शदाता के रूप में भी काम कर सकता है। इसमें पैसा भी अच्छा मिल जाता है, लेकिन यह केवल उन लोगों के लिए है जो इस सेक्टर से काफी समय से जुडे हुए हैं।
अच्छी आय
डेयरी का कोर्स करने के बाद व्यक्ति की आय उसके द्वारा शुरू किए गए काम के स्तर से निर्धारित होती है। इस क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों में डेयरी प्रशिक्षितों का चयन प्रशिक्षु या शिफ्ट अधिकारी के रूप में होता है। इनका प्रारंभिक वेतन कंपनियों के व्यापारिक कद पर निर्भर करता है। अनुभव के बाद पैसे काफी मिलते हैं। यदि स्वरोजगार का विकल्प अपनाते हैं, तो लाखों में रुपये कमा सकते हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि यदि आपमें काबिलियत है, तो इस इंडस्ट्री में पैसे की कमी नहीं है।
कहां से लें प्रशिक्षण
नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु
डेयरी साइंस इंस्टीट्यूट, मुंबई
इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट, इलाहाबाद
संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, पटना
कॉलेज ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, रायपुर
इंदिरा गांधी नेशनल ओपेन यूनिवर्सिटी, दिल्ली
सेठ एम.सी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस, आणंद
नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल
एनडीडीबी
नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की स्थापना सन 1965 में डॉ. वर्गीज कुरियन और डॉ. अमृता पटेल (वर्तमान चेयरमैन) ने गुजरात राज्य के आणंद में की थी। इसे सन 1987 में एनडीडीबी अधिनियम के तहत एक सांविधिक निकाय घोषित किया गया। एनडीडीबी ने सन 1970 में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप ही भारत विश्व मानचित्र पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला देश बनकर सामने आया है।
ग्रामीण क्षेत्रों की बदलेगी तकदीर
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का अहम योगदान है। यहां की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है और हर दो ग्रामीण घरों में से एक किसी न किसी रूप में डेयरी उद्योग से जुडा हुआ है। देश में जितना भी दूध का उत्पादन किया जाता है, उसका लगभग 70 प्रतिशत छोटे स्तर पर सामान्य एवं गरीब ग्रामीणों द्वारा ही किया जाता है। अभी भी यह क्षेत्र ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में तब्दील नहीं हो पाया है। अनुमान के अनुसार तकरीबन 20 प्रतिशत के करीब ही यह कारोबार आर्गेनाइज्ड है। असंगठित होने के कारण पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने के बाद भी दूध का उत्पादन और उसकी गुणवत्ता में वांछित लक्ष्य अभी हासिल नहीं किया जा सका है। इसके पीछे प्रमुख कारण लोगों में जागरुकता की कमी और पर्याप्त संख्या में डेयरी टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित लोगों का न होना है। डेयरी एक ऐसा सेक्टर है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत कुछ किया जा सकता है। इन जगहों पर इसे अगर पूरी तरह संगठित उद्योग के रूप में स्थापित किया जाए तो दूध के उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा और इस कार्य में लगे लोगों की आय में भी सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है।
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